संचारी रोगों के 5 प्रकार कौन से हैं?HealthPlanet

Posted on Tue 13th Dec 2022 : 16:18


स्वाइन फ्लू

स्वाइन इन्फ़्लुएन्ज़ा (स्वाइन फ्लू) सूअरों में एक श्वास संबन्धी रोग है जो टाइप ए इन्फ़्लुएन्ज़ा वायरस द्वारा होता है और सूअरों में नियमित रूप से फैलता है। मनुष्यों को आमतौर पर स्वाइन फ्लू नहीं होता है, लेकिन मानवीय संक्रमण हो सकते हैं तथा होते हैं। स्वाइन फ्लू वायरस व्यक्ति-से-व्यक्ति को फैलने की जानकारी पहले भी प्रकाश में आई है, लेकिन पूर्व में, इसका संचरण सीमित था तथा तीन लोगों से अधिक में टिकता नहीं था।

मार्च 2009 के अंत तथा अप्रैल 2009 की शुरुआत में स्वाइन इन्फ़्लुएन्ज़ा ए (H1N1) वायरस से दक्षिणी कैलिफोर्निया तथा सैन एन्तेनियो के निकट मानव संक्रमण के पहले मामलों की जानकारी सामने आई। अमेरिका के अन्य राज्यों ने भी मानवों में स्वाइन फ्लू संक्रमण के मामलों की जानकारी दी है तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी मामलों की जानकारी दी गई है।

लोगों में स्वाइन फ्लू के चिह्न तथा लक्षण

लोगों में स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य मानवीय फ्लू के समान ही होते हैं तथा इनमें शामिल हैं बुखार, कफ, गला खराब होना, शरीर में दर्द, कंपकंपी तथा थकावट। कुछ लोगों ने स्वाइन फ्लू से जुड़े लक्षणों में डायरिया तथा वमन भी बताए हैं। पूर्व में, लोगों में स्वाइन फ्लू से संक्रमण के कारण स्वास्थ्य अत्यंत खराब होने (निमोनिया तथा श्वास प्रणाली की विफलता) एवं मृत्यु की जानकारी दी गई है। मौसमी फ्लू की तरह, स्वाइन फ्लू भी दीर्घकालीन स्वास्थ्य समस्याओं को और बदतर कर सकता है।

फ्लू के वायरस मुख्य रूप से व्यक्ति से व्यक्ति को खांसने या इन्फ़्लुएन्ज़ा से पीड़ित व्यक्ति के छींकने से फैलता हैं। कभी-कभी लोग किसी चीज़ पर लगे फ्लू के वाइरस को छूने एवं उसके बाद उनके मुंह या नाक को छूने से संक्रमित हो सकते हैं।



बीमार होने के बाद संक्रमित व्यक्ति अन्य लोगों को पहले दिन की शुरुआत से लेकर सात दिनों या उससे अधिक दिनों तक संक्रमित कर सकते हैं। इसका मतलब है इससे पहले कि आपको ज्ञात हो कि आप बीमार हैं, आप किसी और को फ्लू संचारित कर सकते हैं, और साथ ही साथ तब भी जब आप बीमार हों।



सबसे पहले तथा अत्यंत महत्त्वपूर्ण: अपने हाथ धोएं। अच्छा सामान्य स्वास्थ्य बनाए रखने का प्रयास करें। पर्याप्त नींद लें, गतिशील रहे, तनाव पर नियन्त्रण रखें, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लें एवं पोषक भोजन लें। फ्लू वायरस की संभावना वाली सतहों को न छूने का प्रयास करें। बीमार लोगों से नज़दीकी संपर्क रखने से बचें।

यदि आप बीमार हैं तो जितना अधिक संभव हो, अन्य लोगों से अपने संपर्क को सीमित रखें। यदि बीमार हों तो काम पर या स्कूल न जाएं। खांसते या छींकते समय अपनी नाक तथा मुंह को टिशु से ढंकें। ऐसा करना आपके आसपास के लोगों को बीमार होने से बचा सकता है। उपयोग किया हुआ टिशु रद्दी की टोकरी में डालें। यदि टिशु न हो तो किसी अन्य वस्तु से अपनी खांसी तथा छींक को ढंकें। उसके बाद, अपने हाथ साफ़ करें, एवं प्रत्येक बार खांसने या छींकने के बाद ऐसा करें।

बार-बार हाथ धोना आपको रोगाणुओं से बचाने में मदद करेगा। हाथ साबुन या पानी से धोएं, या अल्कोहोल-आधारित हाथ धोने के पदार्थ से। यह सिफारिश की जाती है कि जब आप अपने हाथ धोते हैं - साबुन तथा गर्म पानी से - तो आप 15 से 20 सेकंड के लिए धोएं। जब साबुन और पानी उपलब्ध न हों तो अल्कोहोल-आधारित हाथ पोंछकर फेंकने योग्य कपड़े के टुकडे या जॅल सैनिटाइज़र का इस्तेमाल किया जा सकता है। आप उन्हें अधिकतर सुपरमार्केट्स या दवाई की दुकानों से प्राप्त कर सकते हैं। जेल के लिए पानी की आवश्यकता नहीं होती; उसमें मौज़ूद अल्कोहोल आपके हाथ पर के रोगाणुओं को मार देता है।

यदि आप बीमार हो जाएं एवं इनमें से किसी भी चेतावनी संकेत का अनुभव करें, तो आपातकालीन चिकित्सा देखभाल लें।

बच्चों में आपातकालीन चेतावनी संकेत जिनमें त्वरित चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है, में शामिल हैं:

सांस तेज़ी से चलना या सांस लेने में तकलीफ
त्वचा का रंग नीला पड़ना
पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ नहीं लेना
नींद से नहीं जागना या बातचीत नहीं करना
इतना चिड़चिड़ा होना कि किसी द्वारा थामे जाना नहीं चाहे
फ्लू जैसे लक्षण में सुधार लेकिन बुखार एवं अधिक खांसी के साथ पुनः लौटना
त्वचा में दानों के साथ बुखार

वयस्कों में आपातकालीन चेतावनी संकेत जिनमें त्वरित चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है, में शामिल हैं:

सांस लेने में तकलीफ या सांस फूलना
छाती या पेट में दर्द या दबाव
अचानक चक्कर आना
भ्रम
तेज़ या लगातार उल्टी होना

आंत्र ज्वर (टाइफायड)

आंत्र ज्वर (टाइफायड) जीवन के लिए एक खतरनाक बीमारी है जो कि सलमोनेल्ला टायफी जीवाणु से होता है। आंत्र ज्वर (टाइफायड) को सामान्यतः एंटीबायोटिक दवाइयों से रोका तथा इसका उपचार किया जा सकता है।

सलमोनेल्ला टायफी केवल मानव मात्र में ही पाया जाता है। आंत्र ज्वर(टाइफायड) से पीड़ित व्यक्ति की रक्त धारा और धमनी मार्ग में जीवाणु प्रवाहित होती हैं। इसके साथ ही कुछेक संवाहक कहलाने वाले व्यक्ति आंत्र ज्वर(टाइफायड) से ठीक हो जाते हैं। किंतु फिर भी उनमें जीवाणु रहता है। इस प्रकार बीमार और संवाहक दोनों ही व्यक्तियों के मल से सलमोनेल्ला टायफी निसृत होती है। सलमोनेल्ला टायफी फैलाने वाले व्यक्तियों द्वारा प्रयोग किये अथवा पकड़े गये खाद्य अथवा पेय पदार्थ पीने या सलमोनेल्ला टायफी से संदूषित पानी से नहाने या पानी से खाद्य सामग्री धोकर खाने से आंत्र ज्वर(टाइफायड) हो सकता है। अतः आंत्र ज्वर (टाइफायड) संसार के ऐसे स्थानों में अधिक पाया जाता है जहां हाथ धोने की परंपरा कम पायी जाती है तथा जहां पानी, मलवाहक गंदगी से प्रदूषित होता है।
जैसे ही सलमोनेल्ला टायफी जीवाणु खायी या पी जाती है वह रक्त धारा में जाकर कई गुणा बढ़ जाती है। शरीर में ज्वर होने तथा अन्य संकेत व लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

सामान्यतः आंत्र ज्वर(टाइफायड) से पीड़ित व्यक्तियों को लगातार 103 से 104 डिग्री फैरेनहाइट का बुखार बना रहता है। उन्हें कमजोरी भी महसूस हो सकती है, पेट में दर्द, सिर दर्द अथवा भूख कम लग सकती है। कुछ मामलों में बीमार व्यक्ति को चपटे दोदरे, गुलाबी रंग के धब्बे पड़ सकते हैं। वास्तव में आंत्र ज्वर(टाइफायड) की बीमारी के संबंध में जानने के लिए केवल एक उपाय है कि मल का नमूना या खून के नमूने में सलमोनेल्ला टाइफी की जांच की जाए।

पीने के पानी को पीने से पहले एक मिनट तक उबाल कर पीएं। यदि बर्फ, बोतल के पानी या उबले पानी से बनी हुई न हो तो पेय पदार्थ बिना बर्फ के ही पीएं। स्वादिष्ट बर्फीले पदार्थ न खाएं जो कि प्रदूषित पानी से बने हो सकते हैं। पूरी तरह पकाए और गर्म तथा वाष्प निकलने वाले खाद्य पदार्थ ही खाएं। कच्ची ऐसी साग सब्जियां और फल न खाएं जिन्हें छीलना संभव न हो। सलाद वाली सब्जियाँ आसानी से प्रदूषित हो जाती है। जब आप छीली जा सकने वाली कच्ची सब्जियां या फल खाएं तो आप स्वयं उन्हें छीलकर खाएं। (पहले अपने हाथ साबुन से धो लें) छिलके न खाएं। जिन दुकानों/स्थानों में खाद्य पदार्थ/पेय पदार्थ साफ सुथरे न रखे जाते हों, वहां से लेकर न खाएं और न पीएं। याद रखें कि आपको टीका लगवाना पड़ेगा। कई सालो के बाद आंत्र ज्वर (टाइफायड) के टीकों का प्रभाव जाता रहता है। यदि आपने पहले टीका लगवाया हो तो आपने डॉक्टर से जांच करवा लें कि क्या वर्धक टीका लगवाने की आवश्यकता तो नहीं है। रोग प्रतिरक्षी दवाइयां आंत्र ज्वर (टाइफायड) को रोक नहीं सकती है, वे केवल उपचार में सहायक सिद्ध हो सकती हैं।


कुकर खांसी (परट्यूसिस/वूपिंग कफ)

यह जीवाणु का संक्रमण होता है जो कि आरंभ में नाक और गला को प्रभावित करता है। यह प्रायः 2 वर्ष से कम आयु के बच्चों की श्वसन प्रणाली को प्रभावित करता है। इस बीमारी का नामकरण इस आधार पर किया गया है कि इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति सांस लेते समय भौंकने जैसी आवाज करता है।

कारणः
यह बोर्डेटेल्ला परट्यूसिया कहलाने वाले जीवाणु के कारण होता है। यह जीवाणु व्यक्तियों के बीच श्वसन क्रिया से निष्कासित जीवाणु से फैलती है। यह तब होता है जब संक्रमण युक्त व्यक्ति खांसते या छींकते हैं। यह संक्रमण युक्त व्यक्तियों के शारीरिक द्रवों से संपर्क होने से भी फैलता है जैसे नाक का पानी गिरना।

लक्षणः

जीवाणु संक्रमण के आरंभ से 7 से 17 दिनों के बाद इसके लक्षण विकसित हो पाते हैं।
जिनमें लक्षण विकसित हो जाते हैं, वे अधिकांश में 2 वर्ष की आयु से कम होते हैं।

ये लक्षण लगभग 6 सप्ताह तक रहते हैं और ये 3 चरणों में विभाजित होते हैं -
चरण-1: इन लक्षणों में छींकना, आंखों से पानी आना, नाक बहना, भूख कम होना, ऊर्जा का ह्रास होना और रात के समय खांसना शामिल है।
चरण-2: इन लक्षणों में लगातार खांसते रहना और इसके बाद भौंकने जैसी आवाज आना तब जबकि बीमार व्यक्ति सांस लेने का प्रयास करता है, आदि शामिल है।
चरण -3: इसके अंतर्गत सुधार की प्रक्रिया आती है जबकि खांसना न तो लगातार होता है और न गंभीर। यह स्तर 4 सप्ताह से प्रायः आरंभ होता है।

पोलियो
यह संक्रामक बीमारी है जो कि पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है किंतु हमेशा स्नायुओं और माँस-पेशियों को प्रभावित करता है।

कारणः
पोलियो वायरस संक्रमण से पैदा होता है। पोलियो का वायरस अंतर्ग्रहण से संप्रेषित होता है जो कि मानव-मल और गंदगी में पाया जाता है। जिन स्थानों पर मानव मल, पीने के पानी या कुओं /तालाब/जलाशयों के पानी को प्रदूषित करती है, वहां पर अधिक आयु के बच्चों और वयस्क व्यक्तियों को इस तरह के पानी में तैरने, नहाने या अंदर जाने देने से यह वायरस प्रभावित कर सकता है। यह प्रायः मल निष्कासन से मुंह के मार्ग से संप्रेषित होता है। यह वायरस नाक या मुंह से होकर प्रवेश करता है और फिर आंतों की ओर बढ़ता है और वहां से यह आंतों की कोशिकाओं में प्रवेश करके हजारों की संख्या के गुणकों में नये वायरस अणुओं में जन्म लेता है। यही मानव मल के साथ हफ्तों तक बाहर आते रहते हैं। इस प्रकार बार-बार आते-जाते रहने के चक्र के माध्यम से समग्र समुदाय को संक्रमण का खतरा होता है।

solved 5
wordpress 3 years ago 5 Answer
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