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सà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤¨ फà¥à¤²à¥‚
सà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤¨ इनà¥à¥žà¥à¤²à¥à¤à¤¨à¥à¥›à¤¾ (सà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤¨ फà¥à¤²à¥‚) सूअरों में à¤à¤• शà¥à¤µà¤¾à¤¸ संबनà¥à¤§à¥€ रोग है जो टाइप ठइनà¥à¥žà¥à¤²à¥à¤à¤¨à¥à¥›à¤¾ वायरस दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ होता है और सूअरों में नियमित रूप से फैलता है। मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ को आमतौर पर सà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤¨ फà¥à¤²à¥‚ नहीं होता है, लेकिन मानवीय संकà¥à¤°à¤®à¤£ हो सकते हैं तथा होते हैं। सà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤¨ फà¥à¤²à¥‚ वायरस वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿-से-वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को फैलने की जानकारी पहले à¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ाश में आई है, लेकिन पूरà¥à¤µ में, इसका संचरण सीमित था तथा तीन लोगों से अधिक में टिकता नहीं था।
मारà¥à¤š 2009 के अंत तथा अपà¥à¤°à¥ˆà¤² 2009 की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में सà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤¨ इनà¥à¥žà¥à¤²à¥à¤à¤¨à¥à¥›à¤¾ ठ(H1N1) वायरस से दकà¥à¤·à¤¿à¤£à¥€ कैलिफोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ तथा सैन à¤à¤¨à¥à¤¤à¥‡à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹ के निकट मानव संकà¥à¤°à¤®à¤£ के पहले मामलों की जानकारी सामने आई। अमेरिका के अनà¥à¤¯ राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ ने à¤à¥€ मानवों में सà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤¨ फà¥à¤²à¥‚ संकà¥à¤°à¤®à¤£ के मामलों की जानकारी दी है तथा अंतरà¥à¤°à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ सà¥à¤¤à¤° पर à¤à¥€ मामलों की जानकारी दी गई है।
लोगों में सà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤¨ फà¥à¤²à¥‚ के चिहà¥à¤¨ तथा लकà¥à¤·à¤£
लोगों में सà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤¨ फà¥à¤²à¥‚ के लकà¥à¤·à¤£ सामानà¥à¤¯ मानवीय फà¥à¤²à¥‚ के समान ही होते हैं तथा इनमें शामिल हैं बà¥à¤–ार, कफ, गला खराब होना, शरीर में दरà¥à¤¦, कंपकंपी तथा थकावट। कà¥à¤› लोगों ने सà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤¨ फà¥à¤²à¥‚ से जà¥à¥œà¥‡ लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में डायरिया तथा वमन à¤à¥€ बताठहैं। पूरà¥à¤µ में, लोगों में सà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤¨ फà¥à¤²à¥‚ से संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ अतà¥à¤¯à¤‚त खराब होने (निमोनिया तथा शà¥à¤µà¤¾à¤¸ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ की विफलता) à¤à¤µà¤‚ मृतà¥à¤¯à¥ की जानकारी दी गई है। मौसमी फà¥à¤²à¥‚ की तरह, सà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤¨ फà¥à¤²à¥‚ à¤à¥€ दीरà¥à¤˜à¤•ालीन सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं को और बदतर कर सकता है।
फà¥à¤²à¥‚ के वायरस मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को खांसने या इनà¥à¥žà¥à¤²à¥à¤à¤¨à¥à¥›à¤¾ से पीड़ित वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के छींकने से फैलता हैं। कà¤à¥€-कà¤à¥€ लोग किसी चीज़ पर लगे फà¥à¤²à¥‚ के वाइरस को छूने à¤à¤µà¤‚ उसके बाद उनके मà¥à¤‚ह या नाक को छूने से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ हो सकते हैं।
बीमार होने के बाद संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ अनà¥à¤¯ लोगों को पहले दिन की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ से लेकर सात दिनों या उससे अधिक दिनों तक संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ कर सकते हैं। इसका मतलब है इससे पहले कि आपको जà¥à¤žà¤¾à¤¤ हो कि आप बीमार हैं, आप किसी और को फà¥à¤²à¥‚ संचारित कर सकते हैं, और साथ ही साथ तब à¤à¥€ जब आप बीमार हों।
सबसे पहले तथा अतà¥à¤¯à¤‚त महतà¥à¤¤à¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£: अपने हाथ धोà¤à¤‚। अचà¥à¤›à¤¾ सामानà¥à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ बनाठरखने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करें। परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ नींद लें, गतिशील रहे, तनाव पर नियनà¥à¤¤à¥à¤°à¤£ रखें, परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में तरल पदारà¥à¤¥ लें à¤à¤µà¤‚ पोषक à¤à¥‹à¤œà¤¨ लें। फà¥à¤²à¥‚ वायरस की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ वाली सतहों को न छूने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करें। बीमार लोगों से नज़दीकी संपरà¥à¤• रखने से बचें।
यदि आप बीमार हैं तो जितना अधिक संà¤à¤µ हो, अनà¥à¤¯ लोगों से अपने संपरà¥à¤• को सीमित रखें। यदि बीमार हों तो काम पर या सà¥à¤•ूल न जाà¤à¤‚। खांसते या छींकते समय अपनी नाक तथा मà¥à¤‚ह को टिशॠसे ढंकें। à¤à¤¸à¤¾ करना आपके आसपास के लोगों को बीमार होने से बचा सकता है। उपयोग किया हà¥à¤† टिशॠरदà¥à¤¦à¥€ की टोकरी में डालें। यदि टिशॠन हो तो किसी अनà¥à¤¯ वसà¥à¤¤à¥ से अपनी खांसी तथा छींक को ढंकें। उसके बाद, अपने हाथ साफ़ करें, à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• बार खांसने या छींकने के बाद à¤à¤¸à¤¾ करें।
बार-बार हाथ धोना आपको रोगाणà¥à¤“ं से बचाने में मदद करेगा। हाथ साबà¥à¤¨ या पानी से धोà¤à¤‚, या अलà¥à¤•ोहोल-आधारित हाथ धोने के पदारà¥à¤¥ से। यह सिफारिश की जाती है कि जब आप अपने हाथ धोते हैं - साबà¥à¤¨ तथा गरà¥à¤® पानी से - तो आप 15 से 20 सेकंड के लिठधोà¤à¤‚। जब साबà¥à¤¨ और पानी उपलबà¥à¤§ न हों तो अलà¥à¤•ोहोल-आधारित हाथ पोंछकर फेंकने योगà¥à¤¯ कपड़े के टà¥à¤•डे या जॅल सैनिटाइज़र का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जा सकता है। आप उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अधिकतर सà¥à¤ªà¤°à¤®à¤¾à¤°à¥à¤•ेटà¥à¤¸ या दवाई की दà¥à¤•ानों से पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर सकते हैं। जेल के लिठपानी की आवशà¥à¤¯à¤•ता नहीं होती; उसमें मौज़ूद अलà¥à¤•ोहोल आपके हाथ पर के रोगाणà¥à¤“ं को मार देता है।
यदि आप बीमार हो जाà¤à¤‚ à¤à¤µà¤‚ इनमें से किसी à¤à¥€ चेतावनी संकेत का अनà¥à¤à¤µ करें, तो आपातकालीन चिकितà¥à¤¸à¤¾ देखà¤à¤¾à¤² लें।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में आपातकालीन चेतावनी संकेत जिनमें तà¥à¤µà¤°à¤¿à¤¤ चिकितà¥à¤¸à¤¾ देखà¤à¤¾à¤² की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है, में शामिल हैं:
सांस तेज़ी से चलना या सांस लेने में तकलीफ
तà¥à¤µà¤šà¤¾ का रंग नीला पड़ना
परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में तरल पदारà¥à¤¥ नहीं लेना
नींद से नहीं जागना या बातचीत नहीं करना
इतना चिड़चिड़ा होना कि किसी दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ थामे जाना नहीं चाहे
फà¥à¤²à¥‚ जैसे लकà¥à¤·à¤£ में सà¥à¤§à¤¾à¤° लेकिन बà¥à¤–ार à¤à¤µà¤‚ अधिक खांसी के साथ पà¥à¤¨à¤ƒ लौटना
तà¥à¤µà¤šà¤¾ में दानों के साथ बà¥à¤–ार
वयसà¥à¤•ों में आपातकालीन चेतावनी संकेत जिनमें तà¥à¤µà¤°à¤¿à¤¤ चिकितà¥à¤¸à¤¾ देखà¤à¤¾à¤² की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है, में शामिल हैं:
सांस लेने में तकलीफ या सांस फूलना
छाती या पेट में दरà¥à¤¦ या दबाव
अचानक चकà¥à¤•र आना
à¤à¥à¤°à¤®
तेज़ या लगातार उलà¥à¤Ÿà¥€ होना
आंतà¥à¤° जà¥à¤µà¤° (टाइफायड)
आंतà¥à¤° जà¥à¤µà¤° (टाइफायड) जीवन के लिठà¤à¤• खतरनाक बीमारी है जो कि सलमोनेलà¥à¤²à¤¾ टायफी जीवाणॠसे होता है। आंतà¥à¤° जà¥à¤µà¤° (टाइफायड) को सामानà¥à¤¯à¤¤à¤ƒ à¤à¤‚टीबायोटिक दवाइयों से रोका तथा इसका उपचार किया जा सकता है।
सलमोनेलà¥à¤²à¤¾ टायफी केवल मानव मातà¥à¤° में ही पाया जाता है। आंतà¥à¤° जà¥à¤µà¤°(टाइफायड) से पीड़ित वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की रकà¥à¤¤ धारा और धमनी मारà¥à¤— में जीवाणॠपà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ होती हैं। इसके साथ ही कà¥à¤›à¥‡à¤• संवाहक कहलाने वाले वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ आंतà¥à¤° जà¥à¤µà¤°(टाइफायड) से ठीक हो जाते हैं। किंतॠफिर à¤à¥€ उनमें जीवाणॠरहता है। इस पà¥à¤°à¤•ार बीमार और संवाहक दोनों ही वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के मल से सलमोनेलà¥à¤²à¤¾ टायफी निसृत होती है। सलमोनेलà¥à¤²à¤¾ टायफी फैलाने वाले वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किये अथवा पकड़े गये खादà¥à¤¯ अथवा पेय पदारà¥à¤¥ पीने या सलमोनेलà¥à¤²à¤¾ टायफी से संदूषित पानी से नहाने या पानी से खादà¥à¤¯ सामगà¥à¤°à¥€ धोकर खाने से आंतà¥à¤° जà¥à¤µà¤°(टाइफायड) हो सकता है। अतः आंतà¥à¤° जà¥à¤µà¤° (टाइफायड) संसार के à¤à¤¸à¥‡ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ में अधिक पाया जाता है जहां हाथ धोने की परंपरा कम पायी जाती है तथा जहां पानी, मलवाहक गंदगी से पà¥à¤°à¤¦à¥‚षित होता है।
जैसे ही सलमोनेलà¥à¤²à¤¾ टायफी जीवाणॠखायी या पी जाती है वह रकà¥à¤¤ धारा में जाकर कई गà¥à¤£à¤¾ बढ़ जाती है। शरीर में जà¥à¤µà¤° होने तथा अनà¥à¤¯ संकेत व लकà¥à¤·à¤£ दिखाई देने लगते हैं।
सामानà¥à¤¯à¤¤à¤ƒ आंतà¥à¤° जà¥à¤µà¤°(टाइफायड) से पीड़ित वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को लगातार 103 से 104 डिगà¥à¤°à¥€ फैरेनहाइट का बà¥à¤–ार बना रहता है। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कमजोरी à¤à¥€ महसूस हो सकती है, पेट में दरà¥à¤¦, सिर दरà¥à¤¦ अथवा à¤à¥‚ख कम लग सकती है। कà¥à¤› मामलों में बीमार वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को चपटे दोदरे, गà¥à¤²à¤¾à¤¬à¥€ रंग के धबà¥à¤¬à¥‡ पड़ सकते हैं। वासà¥à¤¤à¤µ में आंतà¥à¤° जà¥à¤µà¤°(टाइफायड) की बीमारी के संबंध में जानने के लिठकेवल à¤à¤• उपाय है कि मल का नमूना या खून के नमूने में सलमोनेलà¥à¤²à¤¾ टाइफी की जांच की जाà¤à¥¤
पीने के पानी को पीने से पहले à¤à¤• मिनट तक उबाल कर पीà¤à¤‚। यदि बरà¥à¤«, बोतल के पानी या उबले पानी से बनी हà¥à¤ˆ न हो तो पेय पदारà¥à¤¥ बिना बरà¥à¤« के ही पीà¤à¤‚। सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ बरà¥à¤«à¥€à¤²à¥‡ पदारà¥à¤¥ न खाà¤à¤‚ जो कि पà¥à¤°à¤¦à¥‚षित पानी से बने हो सकते हैं। पूरी तरह पकाठऔर गरà¥à¤® तथा वाषà¥à¤ª निकलने वाले खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ ही खाà¤à¤‚। कचà¥à¤šà¥€ à¤à¤¸à¥€ साग सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ और फल न खाà¤à¤‚ जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ छीलना संà¤à¤µ न हो। सलाद वाली सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤ आसानी से पà¥à¤°à¤¦à¥‚षित हो जाती है। जब आप छीली जा सकने वाली कचà¥à¤šà¥€ सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ या फल खाà¤à¤‚ तो आप सà¥à¤µà¤¯à¤‚ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ छीलकर खाà¤à¤‚। (पहले अपने हाथ साबà¥à¤¨ से धो लें) छिलके न खाà¤à¤‚। जिन दà¥à¤•ानों/सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ में खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥/पेय पदारà¥à¤¥ साफ सà¥à¤¥à¤°à¥‡ न रखे जाते हों, वहां से लेकर न खाà¤à¤‚ और न पीà¤à¤‚। याद रखें कि आपको टीका लगवाना पड़ेगा। कई सालो के बाद आंतà¥à¤° जà¥à¤µà¤° (टाइफायड) के टीकों का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ जाता रहता है। यदि आपने पहले टीका लगवाया हो तो आपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से जांच करवा लें कि कà¥à¤¯à¤¾ वरà¥à¤§à¤• टीका लगवाने की आवशà¥à¤¯à¤•ता तो नहीं है। रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¥€ दवाइयां आंतà¥à¤° जà¥à¤µà¤° (टाइफायड) को रोक नहीं सकती है, वे केवल उपचार में सहायक सिदà¥à¤§ हो सकती हैं।
कà¥à¤•र खांसी (परटà¥à¤¯à¥‚सिस/वूपिंग कफ)
यह जीवाणॠका संकà¥à¤°à¤®à¤£ होता है जो कि आरंठमें नाक और गला को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। यह पà¥à¤°à¤¾à¤¯à¤ƒ 2 वरà¥à¤· से कम आयॠके बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की शà¥à¤µà¤¸à¤¨ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। इस बीमारी का नामकरण इस आधार पर किया गया है कि इस बीमारी से पीड़ित वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ सांस लेते समय à¤à¥Œà¤‚कने जैसी आवाज करता है।
कारणः
यह बोरà¥à¤¡à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤²à¥à¤²à¤¾ परटà¥à¤¯à¥‚सिया कहलाने वाले जीवाणॠके कारण होता है। यह जीवाणॠवà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के बीच शà¥à¤µà¤¸à¤¨ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से निषà¥à¤•ासित जीवाणॠसे फैलती है। यह तब होता है जब संकà¥à¤°à¤®à¤£ यà¥à¤•à¥à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ खांसते या छींकते हैं। यह संकà¥à¤°à¤®à¤£ यà¥à¤•à¥à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के शारीरिक दà¥à¤°à¤µà¥‹à¤‚ से संपरà¥à¤• होने से à¤à¥€ फैलता है जैसे नाक का पानी गिरना।
लकà¥à¤·à¤£à¤ƒ
जीवाणॠसंकà¥à¤°à¤®à¤£ के आरंठसे 7 से 17 दिनों के बाद इसके लकà¥à¤·à¤£ विकसित हो पाते हैं।
जिनमें लकà¥à¤·à¤£ विकसित हो जाते हैं, वे अधिकांश में 2 वरà¥à¤· की आयॠसे कम होते हैं।
ये लकà¥à¤·à¤£ लगà¤à¤— 6 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक रहते हैं और ये 3 चरणों में विà¤à¤¾à¤œà¤¿à¤¤ होते हैं -
चरण-1: इन लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में छींकना, आंखों से पानी आना, नाक बहना, à¤à¥‚ख कम होना, ऊरà¥à¤œà¤¾ का हà¥à¤°à¤¾à¤¸ होना और रात के समय खांसना शामिल है।
चरण-2: इन लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में लगातार खांसते रहना और इसके बाद à¤à¥Œà¤‚कने जैसी आवाज आना तब जबकि बीमार वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ सांस लेने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करता है, आदि शामिल है।
चरण -3: इसके अंतरà¥à¤—त सà¥à¤§à¤¾à¤° की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ आती है जबकि खांसना न तो लगातार होता है और न गंà¤à¥€à¤°à¥¤ यह सà¥à¤¤à¤° 4 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ से पà¥à¤°à¤¾à¤¯à¤ƒ आरंठहोता है।
पोलियो
यह संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• बीमारी है जो कि पूरे शरीर को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है किंतॠहमेशा सà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¥à¤“ं और माà¤à¤¸-पेशियों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है।
कारणः
पोलियो वायरस संकà¥à¤°à¤®à¤£ से पैदा होता है। पोलियो का वायरस अंतरà¥à¤—à¥à¤°à¤¹à¤£ से संपà¥à¤°à¥‡à¤·à¤¿à¤¤ होता है जो कि मानव-मल और गंदगी में पाया जाता है। जिन सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ पर मानव मल, पीने के पानी या कà¥à¤“ं /तालाब/जलाशयों के पानी को पà¥à¤°à¤¦à¥‚षित करती है, वहां पर अधिक आयॠके बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ और वयसà¥à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को इस तरह के पानी में तैरने, नहाने या अंदर जाने देने से यह वायरस पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है। यह पà¥à¤°à¤¾à¤¯à¤ƒ मल निषà¥à¤•ासन से मà¥à¤‚ह के मारà¥à¤— से संपà¥à¤°à¥‡à¤·à¤¿à¤¤ होता है। यह वायरस नाक या मà¥à¤‚ह से होकर पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करता है और फिर आंतों की ओर बढ़ता है और वहां से यह आंतों की कोशिकाओं में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करके हजारों की संखà¥à¤¯à¤¾ के गà¥à¤£à¤•ों में नये वायरस अणà¥à¤“ं में जनà¥à¤® लेता है। यही मानव मल के साथ हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ तक बाहर आते रहते हैं। इस पà¥à¤°à¤•ार बार-बार आते-जाते रहने के चकà¥à¤° के माधà¥à¤¯à¤® से समगà¥à¤° समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ को संकà¥à¤°à¤®à¤£ का खतरा होता है।
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